Woh Sham Kuch Ajeeb Thi Lyrics – वो शाम कुछ अजीब थी

Woh Sham Kuch Ajeeb Thi Lyrics – वो शाम कुछ अजीब थी

वो शाम कुछ अजीब थी
ये शाम भी अजीब है

वो कल भी पास पास थी
वो आज भी करीब है

झुकी हुई निगाह में
कहीं मेरा ख़याल था
दबी दबी हँसी में इक
हसीन सा गुलाल था
मैं सोचता था मेरा नाम
गुनगुना रही है वो
न जाने क्यों लगा मुझे
के मुस्कुरा रही है वो

मेरा ख़याल है अभी
झुकी हुई निगाह में
खिली हुई हँसी भी है
दबी हुई सी चाह में
मैं जानता हूँ मेरा नाम
गुनगुना रही है वो
यही ख़याल है मुझे
के साथ आ रही है वो

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